महाभारत 3.208.5
यां कपर्दिसुतामाहुर्दृश्यादृश्येति देहिनःतनुत्वात्सा सिनीवाली तृतीयाङ्गिरसः सुता
yāṃ kapardisutāmāhurdṛśyādṛśyeti dehinaḥtanutvātsā sinīvālī tṛtīyāṅgirasaḥ sutā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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