महाभारत 3.208.7
महामखेष्वाङ्गिरसी दीप्तिमत्सु महामतीमहामतीति विख्याता सप्तमी कथ्यते सुता
mahāmakheṣvāṅgirasī dīptimatsu mahāmatīmahāmatīti vikhyātā saptamī kathyate sutā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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