महाभारत 3.224.2
ततस्तैः संविदं कृत्वा यथावन्मधुसूदनःआरुरुक्षू रथं सत्यामाह्वयामास केशवः
tatastaiḥ saṃvidaṃ kṛtvā yathāvanmadhusūdanaḥārurukṣū rathaṃ satyāmāhvayāmāsa keśavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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