महाभारत 3.235.14
उपकारो महांस्तात कृतोऽयं मम खेचराःकुलं न परिभूतं मे मोक्षेणास्य दुरात्मनः
upakāro mahāṃstāta kṛto'yaṃ mama khecarāḥkulaṃ na paribhūtaṃ me mokṣeṇāsya durātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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