महाभारत 3.235.2
किं ते व्यवसितं वीर कौरवाणां विनिग्रहेकिमर्थं च सदारोऽयं निगृहीतः सुयोधनः
kiṃ te vyavasitaṃ vīra kauravāṇāṃ vinigrahekimarthaṃ ca sadāro'yaṃ nigṛhītaḥ suyodhanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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