महाभारत 3.235.4
वनस्थान्भवतो ज्ञात्वा क्लिश्यमानाननर्हवत्इमेऽवहसितुं प्राप्ता द्रौपदीं च यशस्विनीम्
vanasthānbhavato jñātvā kliśyamānānanarhavatime'vahasituṃ prāptā draupadīṃ ca yaśasvinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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