महाभारत 3.239.4
अतिभीरुमतिक्लीबं दीर्घसूत्रं प्रमादिनम्व्यसनाद्विषयाक्रान्तं न भजन्ति नृपं श्रियः
atibhīrumatiklībaṃ dīrghasūtraṃ pramādinamvyasanādviṣayākrāntaṃ na bhajanti nṛpaṃ śriyaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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