महाभारत 3.239.7
प्रसीद मा त्यजात्मानं तुष्टश्च सुकृतं स्मरप्रयच्छ राज्यं पार्थानां यशो धर्ममवाप्नुहि
prasīda mā tyajātmānaṃ tuṣṭaśca sukṛtaṃ smaraprayaccha rājyaṃ pārthānāṃ yaśo dharmamavāpnuhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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