महाभारत 3.243.10
हतेषु युधि पार्थेषु राजसूये तथा त्वयाआहृतेऽहं नरश्रेष्ठ त्वां सभाजयिता पुनः
hateṣu yudhi pārtheṣu rājasūye tathā tvayāāhṛte'haṃ naraśreṣṭha tvāṃ sabhājayitā punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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