महाभारत 3.243.12
निहतेषु नरश्रेष्ठ प्राप्ते चापि महाक्रतौराजसूये पुनर्वीर त्वं मां संवर्धयिष्यसि
nihateṣu naraśreṣṭha prāpte cāpi mahākrataurājasūye punarvīra tvaṃ māṃ saṃvardhayiṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें