महाभारत 3.243.13
एवमुक्त्वा महाप्राज्ञः कर्णमाश्लिष्य भारतराजसूयं क्रतुश्रेष्ठं चिन्तयामास कौरवः
evamuktvā mahāprājñaḥ karṇamāśliṣya bhāratarājasūyaṃ kratuśreṣṭhaṃ cintayāmāsa kauravaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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