महाभारत 3.243.4
एवं तत्राब्रुवन्केचिद्वातिकास्तं नरेश्वरम्सुहृदस्त्वब्रुवंस्तत्र अति सर्वानयं क्रतुः
evaṃ tatrābruvankecidvātikāstaṃ nareśvaramsuhṛdastvabruvaṃstatra ati sarvānayaṃ kratuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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