महाभारत 3.243.9
तमुत्थाय महाराज सूतपुत्रोऽब्रवीद्वचःदिष्ट्या ते भरतश्रेष्ठ समाप्तोऽयं महाक्रतुः
tamutthāya mahārāja sūtaputro'bravīdvacaḥdiṣṭyā te bharataśreṣṭha samāpto'yaṃ mahākratuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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