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महाभारत 3.244.3
तानब्रवीत्स राजेन्द्रो वेपमानान्कृताञ्जलीन्ब्रूत यद्वक्तुकामाः स्थ के भवन्तः किमिष्यते
tānabravītsa rājendro vepamānānkṛtāñjalīnbrūta yadvaktukāmāḥ stha ke bhavantaḥ kimiṣyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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