महाभारत 3.271.3
बहुधा युध्यमानास्ते युद्धमार्गैः प्लवंगमाःनानाप्रहरणैर्भीमं राक्षसेन्द्रमताडयन्
bahudhā yudhyamānāste yuddhamārgaiḥ plavaṃgamāḥnānāpraharaṇairbhīmaṃ rākṣasendramatāḍayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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