महाभारत 3.293.13
एवं स सूतपुत्रत्वं जगामामितविक्रमःवसुषेण इति ख्यातो वृष इत्येव च प्रभुः
evaṃ sa sūtaputratvaṃ jagāmāmitavikramaḥvasuṣeṇa iti khyāto vṛṣa ityeva ca prabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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