महाभारत 3.293.4
सा तां कौतूहलात्प्राप्तां ग्राहयामास भामिनीततो निवेदयामास सूतस्याधिरथस्य वै
sā tāṃ kautūhalātprāptāṃ grāhayāmāsa bhāminītato nivedayāmāsa sūtasyādhirathasya vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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