महाभारत 3.293.7
स सूतो भार्यया सार्धं विस्मयोत्फुल्ललोचनःअङ्कमारोप्य तं बालं भार्यां वचनमब्रवीत्
sa sūto bhāryayā sārdhaṃ vismayotphullalocanaḥaṅkamāropya taṃ bālaṃ bhāryāṃ vacanamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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