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महाभारत 3.4.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
ततो दिवाकरः प्रीतो दर्शयामास पाण्डवम्दीप्यमानः स्ववपुषा ज्वलन्निव हुताशनः
tato divākaraḥ prīto darśayāmāsa pāṇḍavamdīpyamānaḥ svavapuṣā jvalanniva hutāśanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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