महाभारत 3.4.8
एवं दिवाकरात्प्राप्य दिवाकरसमद्युतिःकामान्मनोऽभिलषितान्ब्राह्मणेभ्यो ददौ प्रभुः
evaṃ divākarātprāpya divākarasamadyutiḥkāmānmano'bhilaṣitānbrāhmaṇebhyo dadau prabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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