महाभारत 3.41.12
एष मे प्रथमः कामो भगवन्भगनेत्रहन्त्वत्प्रसादाद्विनिर्वृत्तः समर्थः स्यामहं यथा
eṣa me prathamaḥ kāmo bhagavanbhaganetrahantvatprasādādvinirvṛttaḥ samarthaḥ syāmahaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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