Loading
महाभारत 3.41.13
भगवानुवाचददानि तेऽस्त्रं दयितमहं पाशुपतं महत्समर्थो धारणे मोक्षे संहारे चापि पाण्डव
bhagavānuvācadadāni te'straṃ dayitamahaṃ pāśupataṃ mahatsamartho dhāraṇe mokṣe saṃhāre cāpi pāṇḍava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें