महाभारत 3.41.19
उपतस्थे महात्मानं यथा त्र्यक्षमुमापतिम्प्रतिजग्राह तच्चापि प्रीतिमानर्जुनस्तदा
upatasthe mahātmānaṃ yathā tryakṣamumāpatimpratijagrāha taccāpi prītimānarjunastadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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