महाभारत 3.41.2
त्वयि वा परमं तेजो विष्णौ वा पुरुषोत्तमेयुवाभ्यां पुरुषाग्र्याभ्यां तेजसा धार्यते जगत्
tvayi vā paramaṃ tejo viṣṇau vā puruṣottameyuvābhyāṃ puruṣāgryābhyāṃ tejasā dhāryate jagat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें