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महाभारत 3.41.8
यत्तद्ब्रह्मशिरो नाम रौद्रं भीमपराक्रमम्युगान्ते दारुणे प्राप्ते कृत्स्नं संहरते जगत्
yattadbrahmaśiro nāma raudraṃ bhīmaparākramamyugānte dāruṇe prāpte kṛtsnaṃ saṃharate jagat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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