महाभारत 3.44.12
नक्षत्रमार्गं विपुलं सुरवीथीति विश्रुतम्इन्द्राज्ञया ययौ पार्थः स्तूयमानः समन्ततः
nakṣatramārgaṃ vipulaṃ suravīthīti viśrutamindrājñayā yayau pārthaḥ stūyamānaḥ samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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