महाभारत 3.44.13
तत्र साध्यास्तथा विश्वे मरुतोऽथाश्विनावपिआदित्या वसवो रुद्रास्तथा ब्रह्मर्षयोऽमलाः
tatra sādhyāstathā viśve maruto'thāśvināvapiādityā vasavo rudrāstathā brahmarṣayo'malāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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