महाभारत 3.44.20ततः शक्रासने पुण्ये देवराजर्षिपूजितेशक्रः पाणौ गृहीत्वैनमुपावेशयदन्तिकेtataḥ śakrāsane puṇye devarājarṣipūjiteśakraḥ pāṇau gṛhītvainamupāveśayadantikeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें