महाभारत 3.44.25वज्रग्रहणचिह्नेन करेण बलसूदनःमुहुर्मुहुर्वज्रधरो बाहू संस्फालयञ्शनैःvajragrahaṇacihnena kareṇa balasūdanaḥmuhurmuhurvajradharo bāhū saṃsphālayañśanaiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें