महाभारत 3.44.2
तत्र सौगन्धिकानां स द्रुमाणां पुण्यगन्धिनाम्उपवीज्यमानो मिश्रेण वायुना पुण्यगन्धिना
tatra saugandhikānāṃ sa drumāṇāṃ puṇyagandhināmupavījyamāno miśreṇa vāyunā puṇyagandhinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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