महाभारत 3.47.5
तांस्तु शूरान्महेष्वासांस्तदा निवसतो वनेअन्वयुर्ब्राह्मणा राजन्साग्नयोऽनग्नयस्तथा
tāṃstu śūrānmaheṣvāsāṃstadā nivasato vaneanvayurbrāhmaṇā rājansāgnayo'nagnayastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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