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महाभारत 3.55.13
भ्रंशयिष्यामि तं राज्यान्न भैम्या सह रंस्यतेत्वमप्यक्षान्समाविश्य कर्तुं साहाय्यमर्हसि
bhraṃśayiṣyāmi taṃ rājyānna bhaimyā saha raṃsyatetvamapyakṣānsamāviśya kartuṃ sāhāyyamarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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