महाभारत 3.55.8
कश्च सर्वगुणोपेतं नाश्रयेत नलं नृपम्यो वेद धर्मानखिलान्यथावच्चरितव्रतः
kaśca sarvaguṇopetaṃ nāśrayeta nalaṃ nṛpamyo veda dharmānakhilānyathāvaccaritavrataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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