महाभारत 3.63.24
एवं नलं समादिश्य वासो दत्त्वा च कौरवनागराजस्ततो राजंस्तत्रैवान्तरधीयत
evaṃ nalaṃ samādiśya vāso dattvā ca kauravanāgarājastato rājaṃstatraivāntaradhīyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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