महाभारत 3.63.3
मा भैरिति नलश्चोक्त्वा मध्यमग्नेः प्रविश्य तम्ददर्श नागराजानं शयानं कुण्डलीकृतम्
mā bhairiti nalaścoktvā madhyamagneḥ praviśya tamdadarśa nāgarājānaṃ śayānaṃ kuṇḍalīkṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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