महाभारत 3.63.4
स नागः प्राञ्जलिर्भूत्वा वेपमानो नलं तदाउवाच विद्धि मां राजन्नागं कर्कोटकं नृप
sa nāgaḥ prāñjalirbhūtvā vepamāno nalaṃ tadāuvāca viddhi māṃ rājannāgaṃ karkoṭakaṃ nṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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