महाभारत 3.63.6
तस्य शापान्न शक्नोमि पदाद्विचलितुं पदम्उपदेक्ष्यामि ते श्रेयस्त्रातुमर्हति मां भवान्
tasya śāpānna śaknomi padādvicalituṃ padamupadekṣyāmi te śreyastrātumarhati māṃ bhavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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