महाभारत 3.63.7
सखा च ते भविष्यामि मत्समो नास्ति पन्नगःलघुश्च ते भविष्यामि शीघ्रमादाय गच्छ माम्
sakhā ca te bhaviṣyāmi matsamo nāsti pannagaḥlaghuśca te bhaviṣyāmi śīghramādāya gaccha mām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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