महाभारत 3.64.11
एवं ब्रुवन्तं राजानं निशायां जीवलोऽब्रवीत्कामेनां शोचसे नित्यं श्रोतुमिच्छामि बाहुक
evaṃ bruvantaṃ rājānaṃ niśāyāṃ jīvalo'bravītkāmenāṃ śocase nityaṃ śrotumicchāmi bāhuka
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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