महाभारत 3.64.13
स वै केनचिदर्थेन तया मन्दो व्ययुज्यतविप्रयुक्तश्च मन्दात्मा भ्रमत्यसुखपीडितः
sa vai kenacidarthena tayā mando vyayujyataviprayuktaśca mandātmā bhramatyasukhapīḍitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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