महाभारत 3.64.14
दह्यमानः स शोकेन दिवारात्रमतन्द्रितःनिशाकाले स्मरंस्तस्याः श्लोकमेकं स्म गायति
dahyamānaḥ sa śokena divārātramatandritaḥniśākāle smaraṃstasyāḥ ślokamekaṃ sma gāyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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