महाभारत 3.64.4
यानि शिल्पानि लोकेऽस्मिन्यच्चाप्यन्यत्सुदुष्करम्सर्वं यतिष्ये तत्कर्तुमृतुपर्ण भरस्व माम्
yāni śilpāni loke'sminyaccāpyanyatsuduṣkaramsarvaṃ yatiṣye tatkartumṛtuparṇa bharasva mām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें