महाभारत 3.64.6
स त्वमातिष्ठ योगं तं येन शीघ्रा हया ममभवेयुरश्वाध्यक्षोऽसि वेतनं ते शतं शताः
sa tvamātiṣṭha yogaṃ taṃ yena śīghrā hayā mamabhaveyuraśvādhyakṣo'si vetanaṃ te śataṃ śatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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