महाभारत 3.65.13
पौर्णमासीमिव निशां राहुग्रस्तनिशाकराम्पतिशोकाकुलां दीनां शुष्कस्रोतां नदीमिव
paurṇamāsīmiva niśāṃ rāhugrastaniśākarāmpatiśokākulāṃ dīnāṃ śuṣkasrotāṃ nadīmiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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