महाभारत 3.65.14
विध्वस्तपर्णकमलां वित्रासितविहंगमाम्हस्तिहस्तपरिक्लिष्टां व्याकुलामिव पद्मिनीम्
vidhvastaparṇakamalāṃ vitrāsitavihaṃgamāmhastihastaparikliṣṭāṃ vyākulāmiva padminīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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