महाभारत 3.65.2
संदिदेश च तान्भीमो वसु दत्त्वा च पुष्कलम्मृगयध्वं नलं चैव दमयन्तीं च मे सुताम्
saṃdideśa ca tānbhīmo vasu dattvā ca puṣkalammṛgayadhvaṃ nalaṃ caiva damayantīṃ ca me sutām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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