महाभारत 3.65.8
तां समीक्ष्य विशालाक्षीमधिकं मलिनां कृशाम्तर्कयामास भैमीति कारणैरुपपादयन्
tāṃ samīkṣya viśālākṣīmadhikaṃ malināṃ kṛśāmtarkayāmāsa bhaimīti kāraṇairupapādayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें