महाभारत 3.7.19
अद्य रात्रौ दिवा चाहं त्वत्कृते भरतर्षभप्रजागरे प्रपश्यामि विचित्रं देहमात्मनः
adya rātrau divā cāhaṃ tvatkṛte bharatarṣabhaprajāgare prapaśyāmi vicitraṃ dehamātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें