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महाभारत 3.72.23
बृहदश्व उवाच · bṛhadaśva uvāca
एवमुक्तस्य केशिन्या नलस्य कुरुनन्दनहृदयं व्यथितं चासीदश्रुपूर्णे च लोचने
evamuktasya keśinyā nalasya kurunandanahṛdayaṃ vyathitaṃ cāsīdaśrupūrṇe ca locane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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