महाभारत 3.73.2
गच्छ केशिनि भूयस्त्वं परीक्षां कुरु बाहुकेअब्रुवाणा समीपस्था चरितान्यस्य लक्षय
gaccha keśini bhūyastvaṃ parīkṣāṃ kuru bāhukeabruvāṇā samīpasthā caritānyasya lakṣaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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